ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 275275.3महाभारत 275.3नारद उवाच उरसेव प्रणमसे बाहुभ्यां तरसीव च संप्रहृष्टमना नित्यं विशोक इव लक्ष्यसेपिछलाअगलापूरा अध्याय