Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 270.16

वृत्र उवाच
सत्येन तपसा चैव विदित्वा संक्षयं ह्यहम्
न शोचामि न हृष्यामि भूतानामागतिं गतिम्

पूरा अध्याय