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महाभारत 261.26

न वीरपत्नीं विहरेत नारीं; न चापि नारीमनृतावाह्वयीत
भार्याव्रतं ह्यात्मनि धारयीत; तथास्योपस्थद्वारगुप्तिर्भवेत

पूरा अध्याय