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महाभारत 25.28

राष्ट्रं रक्षन्बुद्धिपूर्वं नयेन; संत्यक्तात्मा यज्ञशीलो महात्मा
सर्वाँल्लोकान्व्याप्य कीर्त्या मनस्वी; वाजिग्रीवो मोदते देवलोके

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