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महाभारत 25.1

वैशंपायन उवाच
पुनरेव महर्षिस्तं कृष्णद्वैपायनोऽब्रवीत्
अजातशत्रुं कौन्तेयमिदं वचनमर्थवत्

पूरा अध्याय