ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 248248.17महाभारत 248.17ततो दिवं भुवं खं च जगच्च सचराचरम् ददाह पावको राजन्भगवत्कोपसंभवःपिछलाअगलापूरा अध्याय