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महाभारत 242.2

व्यास उवाच
धर्मं ते संप्रवक्ष्यामि पुराणमृषिसंस्तुतम्
विशिष्टं सर्वधर्मेभ्यस्तमिहैकमनाः शृणु

पूरा अध्याय