ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 239239.1महाभारत 239.1शुक उवाच अध्यात्मं विस्तरेणेह पुनरेव वदस्व मे यदध्यात्मं यथा चेदं भगवन्नृषिसत्तमअगलापूरा अध्याय