Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 236.24

सद्यस्क्रांश्च यजेद्यज्ञानिष्टीश्चैवेह सर्वदा
सदैव याजिनां यज्ञादात्मनीज्या निवर्तते

पूरा अध्याय