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महाभारत 236.1

भीष्म उवाच
प्रोक्ता गृहस्थवृत्तिस्ते विहिता या मनीषिणाम्
तदनन्तरमुक्तं यत्तन्निबोध युधिष्ठिर

पूरा अध्याय