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महाभारत 231.5

व्यास उवाच
नान्यत्र विद्यातपसोर्नान्यत्रेन्द्रियनिग्रहात्
नान्यत्र सर्वसंत्यागात्सिद्धिं विन्दति कश्चन

पूरा अध्याय