Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 224.59

कर्मजोऽयं पृथग्भावो द्वंद्वयुक्तो वियोगिनः
आत्मसिद्धिस्तु विज्ञाता जहाति प्रायशो बलम्

पूरा अध्याय