Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 224.34

अभिभूयेह चार्चिष्मद्व्यसृजत्सप्त मानसान्
दूरगं बहुधागामि प्रार्थनासंशयात्मकम्

पूरा अध्याय