ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 221221.87महाभारत 221.87ततो दिवं प्राप्य सहस्रलोचनः; श्रियोपपन्नः सुहृदा सुरर्षिणा रथेन हर्यश्वयुजा सुरर्षभः; सदः सुराणामभिसत्कृतो ययौपिछलाअगलापूरा अध्याय