ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 221221.7महाभारत 221.7सहस्रनयनश्चापि वज्री शम्बरपाकहा तस्या देवर्षिजुष्टायास्तीरमभ्याजगाम हपिछलाअगलापूरा अध्याय