ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 221221.24महाभारत 221.24जितकाशिनि शूरे च संग्रामेष्वनिवर्तिनि निवसामि मनुष्येन्द्रे सदैव बलसूदनपिछलाअगलापूरा अध्याय