Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 220.47

राजलोका ह्यतिक्रान्ता यान्न संख्यातुमुत्सहे
त्वत्तो बहुतराश्चान्ये भविष्यन्ति पुरंदर

पूरा अध्याय