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महाभारत 220.116

तमेवमुक्त्वा भगवाञ्शतक्रतुः; प्रतिप्रयातो गजराजवाहनः
विजित्य सर्वानसुरान्सुराधिपो; ननन्द हर्षेण बभूव चैकराट्

पूरा अध्याय