Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 218.19

श्रीरुवाच
स्थास्यामि नित्यं देवेन्द्र यथा त्वयि निबोध तत्
विधिना वेददृष्टेन चतुर्धा विभजस्व माम्

पूरा अध्याय