Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 217.57

यामेतां प्राप्य जानीषे राजश्रियमनुत्तमाम्
स्थिता मयीति तन्मिथ्या नैषा ह्येकत्र तिष्ठति

पूरा अध्याय