ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 217217.34महाभारत 217.34कल्याणी रूपसंपन्ना दुर्भगा शक्र दृश्यते अलक्षणा विरूपा च सुभगा शक्र दृश्यतेपिछलाअगलापूरा अध्याय