ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 210210.28महाभारत 210.28मर्त्यलोकाद्विमुच्यन्ते विद्यासंयुक्तमानसाः ब्रह्मभूता विरजसस्ततो यान्ति परां गतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय