ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 207207.7महाभारत 207.7यदिदं ब्रह्मणो रूपं ब्रह्मचर्यमिति स्मृतम् परं तत्सर्वभूतेभ्यस्तेन यान्ति परां गतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय