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महाभारत 206.21

ज्ञानेन्द्रियाणीन्द्रियार्थान्नोपसर्पन्त्यतर्षुलम्
ज्ञातैश्च कारणैर्देही न देहं पुनरर्हति

पूरा अध्याय