ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 205205.3महाभारत 205.3सद्भिराचरितत्वात्तु वृत्तमेतदगर्हितम् इयं सा बुद्धिरन्येयं यया याति परां गतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय