ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 204204.3महाभारत 204.3अभिद्रवत्ययस्कान्तमयो निश्चेतनावुभौ स्वभावहेतुजा भावा यद्वदन्यदपीदृशम्पिछलाअगलापूरा अध्याय