ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 22.23महाभारत 2.23तं स विप्रोऽब्रवीत्क्रुद्धो वाचा निर्भर्त्सयन्निव दुराचार वधार्हस्त्वं फलं प्राप्नुहि दुर्मतेपिछलाअगलापूरा अध्याय