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महाभारत 195.23

चलं यथा दृष्टिपथं परैति; सूक्ष्मं महद्रूपमिवाभिपाति
स्वरूपमालोचयते च रूपं; परं तथा बुद्धिपथं परैति

पूरा अध्याय