ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 1919.20महाभारत 19.20कल्याणगोचरं कृत्वा मनस्तृष्णां निगृह्य च कर्मसंततिमुत्सृज्य स्यान्निरालम्बनः सुखीपिछलाअगलापूरा अध्याय