ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 187187.47महाभारत 187.47एवंस्वभावमेवैतत्स्वबुद्ध्या विहरेन्नरः अशोचन्नप्रहृष्यंश्च चरेद्विगतमत्सरःपिछलाअगलापूरा अध्याय