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महाभारत 180.20

पञ्चात्मके पञ्चगुणप्रदर्शी; स सर्वगात्रानुगतोऽन्तरात्मा
स वेत्ति दुःखानि सुखानि चात्र; तद्विप्रयोगात्तु न वेत्ति देहः

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