ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 180180.2महाभारत 180.2न शरीराश्रितो जीवस्तस्मिन्नष्टे प्रणश्यति यथा समित्सु दग्धासु न प्रणश्यति पावकःपिछलाअगलापूरा अध्याय