Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 172.26

अचलितमतिरच्युतः स्वधर्मा;त्परिमितसंसरणः परावरज्ञः
विगतभयकषायलोभमोहो; व्रतमिदमाजगरं शुचिश्चरामि

पूरा अध्याय