ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 171171.25महाभारत 171.25काम जानामि ते मूलं संकल्पात्किल जायसे न त्वां संकल्पयिष्यामि समूलो न भविष्यसिपिछलाअगलापूरा अध्याय