ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 170170.6महाभारत 170.6न वै चरसि यच्छ्रेय आत्मनो वा यदीहसे अकामात्मापि हि सदा धुरमुद्यम्य चैव हिपिछलाअगलापूरा अध्याय