Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 17.13

निरामिषा न शोचन्ति शोचसि त्वं किमामिषम्
परित्यज्यामिषं सर्वं मृषावादात्प्रमोक्ष्यसे

पूरा अध्याय