ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 168168.21महाभारत 168.21न बुद्धिर्धनलाभाय न जाड्यमसमृद्धये लोकपर्यायवृत्तान्तं प्राज्ञो जानाति नेतरःपिछलाअगलापूरा अध्याय