ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 160160.27महाभारत 160.27हिरण्यकशिपुश्चैव हिरण्याक्षो विरोचनः शम्बरो विप्रचित्तिश्च प्रह्रादो नमुचिर्बलिःपिछलाअगलापूरा अध्याय