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महाभारत 149.28

गृध्र उवाच
अहो धिक्सुनृशंसेन जम्बुकेनाल्पमेधसा
क्षुद्रेणोक्ता हीनसत्त्वा मानुषाः किं निवर्तथ

पूरा अध्याय