ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 147147.13महाभारत 147.13विदित्वोभयतो वीर्यं माहात्म्यं वेद आगमे कुरुष्वेह महाशान्तिं ब्रह्मा शरणमस्तु तेपिछलाअगलापूरा अध्याय