ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 142142.20महाभारत 142.20इति सा शकुनी वाक्यं क्षारकस्था तपस्विनी अतिदुःखान्विता प्रोच्य भर्तारं समुदैक्षतपिछलाअगलापूरा अध्याय