ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 1414.5महाभारत 14.5आमन्त्र्य विपुलश्रोणी साम्ना परमवल्गुना भर्तारमभिसंप्रेक्ष्य ततो वचनमब्रवीत्पिछलाअगलापूरा अध्याय