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महाभारत 139.79

श्वपच उवाच
सुहृद्भूत्वानुशास्मि त्वा कृपा हि त्वयि मे द्विज
तदेवं श्रेय आधत्स्व मा लोभाच्छ्वानमादिथाः

पूरा अध्याय