Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 137.5

काम्पिल्ये ब्रह्मदत्तस्य अन्तःपुरनिवासिनी
पूजनी नाम शकुनी दीर्घकालं सहोषिता

पूरा अध्याय