ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 133133.13महाभारत 133.13कापव्य उवाच मा वधीस्त्वं स्त्रियं भीरुं मा शिशुं मा तपस्विनम् नायुध्यमानो हन्तव्यो न च ग्राह्या बलात्स्त्रियःपिछलाअगलापूरा अध्याय