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महाभारत 130.1

युधिष्ठिर उवाच
हीने परमके धर्मे सर्वलोकातिलङ्घिनि
सर्वस्मिन्दस्युसाद्भूते पृथिव्यामुपजीवने

पूरा अध्याय