ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 125125.20महाभारत 125.20प्रविश्य तु महारण्यं तापसानामथाश्रमम् आससाद ततो राजा श्रान्तश्चोपाविशत्पुनःपिछलाअगलापूरा अध्याय