Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 124.8

किमर्थं तप्यसे पुत्र श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः
श्रुत्वा त्वामनुनेष्यामि यदि सम्यग्भविष्यसि

पूरा अध्याय