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महाभारत 121.32

तेजः कर्मणि पाण्डित्यं वाक्शक्तिस्तत्त्वबुद्धिता
एवं दण्डस्य कौरव्य लोकेऽस्मिन्बहुरूपता

पूरा अध्याय