ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 121121.23महाभारत 121.23यथोक्ता ब्रह्मकन्येति लक्ष्मीर्नीतिः सरस्वती दण्डनीतिर्जगद्धात्री दण्डो हि बहुविग्रहःपिछलाअगलापूरा अध्याय